मूलाधार चक्र साधना

मूलाधार चक्र साधना

मूलाधार Muladhar चक्र के चित्र में चार पंखुडिय़ों वाला एक कमल है। ये चारों मन के चार कार्यों :

पहला स्थान शिव धर्म प्राण ,स्नायु तंत्र , है दुसरा शक्ति चामुंडा ,तनाव मुक्ति , तीसरा सुर्य काम शक्ति है। एवं चौथा सौंदर्य वाणी , सहस्रार चक्र मोक्ष इस चक्र के अंदर त्रिकोण में कुछ ओर शक्तियां समाहित है , जिस का ग्यान आगे शिव धर्म कुंडलीनी जागरण साधना करने वाले को दिया ही जाता है , सभी इस चक्र में उत्पन्न होते हैं। मनुष्य शरीर के सात चक्रों में से मूलाधार चक्र प्रथम चक्र है. इसका स्थान मनुष्य रीढ़ हड्डी के नीचे गुदा और लिंग के मध्य होता है. इस चक्र में 4 पंखुडियां होती है इसके सबसे नीचे स्थित होने के कारण ही इसे आधार चक्र कहा जाता है. क्योकि हर बहुत ही कम व्यक्ति अपने चक्रों को जाग्रत कर पाता है जिसके कारण उनकी चेतना मूलाधार चक्र में ही फंसी रहती है और उनके मरने के समय में भी उनकी चेतना वहीँ रहती है. अगर आप भोग, विलास, संभोग, आलस मे लिप्त मानव ,जन्म मरन नरक एवं अधर्म में फंसा रहता है। आपकी चेतना और उर्जा मूलाधार चक्र के आसपास ही एकत्र हो जाती है. व्यक्ति की गति कर्मों के अनुसार ही तय होती है कि यही से स्वर्ग ओर यही से नरक का द्वार खुलता हैं।

मूलाधार चक्र मुलाधार चक्र साधना बिना मूलाधार चक्र ना तो व्यक्ति के उर्जा रूप शरीर का निर्माण होता है और ना ही उसके भौतिक शरीर का तो यहीं से अंदाजा लगाया जा सकता है कि मूलाधार चक्र व्यक्ति के जीवन में कितना महत्व रखता है. जब व्यक्ति अपनी कुंडलिनी शक्ति को जाग्रत करना चाहता है तो उसकी शुरुआत भी उसे मूलाधार चक्र से ही करनी पड़ती है. ·

मूलाधार चक्र जागरण प्रभाव :

जब किसी व्यक्ति का मूलाधार चक्र जाग्रत हो जाता है तो उसके स्वभाव में परिवर्तन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है. जिससे व्यक्ति निर्भीक और उसके अंदर वीरता की भावना उत्पन्न होने लगती है. इसके साथ ही उसके मन में आनंद का भाव भी उत्पन्न हो जाता है. किन्तु आप इस बात का ध्यान रखें कि जब भी आप अपने मूलाधार चक्र को जागृत करने के बारे में विचार करें तो आप एक संकल्प के साथ और पूर्ण जागरूकता के साथ ही इसकी शुरुआत करें. · मूलाधार चकएक का बीज तो “ लं ” है परंतु इस से पहले अपने आधार को मजबूत बनाने के लिए सहायक देवी देवताओं को ज्रागत करना जरूरी है जो भक्तों को सुरक्षित मुलाधार चक्र साधना एवं कुंडलीनी जागरण मे सफलता की प्रथम सीढ़ी है।

१- गणेश मंत्र

२- चांमुन्डा महाकाली

३- शिव जी

4- ब्रम्हा

5- इन्द्र देव

6- डाकिनी देवी

सब से पहले इन्हें सिद्ध करने के लिए सहायक , 3 सेट यन्त्रों माला द्वारा मंत्र साधना करे इस किट के साथ साथ आप को पावर फूल मंत्र फ्री दिया जाये गा। इसके साथ आप के अंदर रोशनी ओर शक्ति द्वारा देखने की ऊर्जा शक्ति उत्पन्न होने लगे गी , जो कुंडलीनी के अंदर ढूंढने में सहायक होती है। अगर आप कुंडलीनी ओर मुलाधार चक्र को अगर देख नही पा रहे हो तो जागरण केसे करो गे। इसलिए आप को सीढ़ी दर सीढ़ी आगे चढ़ते जाना है। आसान ओर सेफ रास्ता यही है जो शिव द्वारा संचालित एवं निर्देशित किया है।

मूलाधार चक्र कूंडलीनी तंत्र साधना

मूलाधार चक्र साधना

मूलाधार कुंडलिनी जागरण मंत्र साधना के लिये मंत्र सिद्ध यंत्र व माला किट का होना आवश्यक है इस कुंडलिनी किट के साथ आप को मंत्र फ्री दिया जाये गा.

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डाकिनी मंत्र साधना

Dakini Kundalini Mantra

डाकिनी

तंत्र जगत में डाकिनी का नाम अति प्रचलित है |सामान्यजन भी इस नाम से परिचित हैं |डाकिनी नाम आते ही एक उग्र स्वरुप की भावना मष्तिष्क में उत्पन्न होती है |वास्तव में यह ऊर्जा का एक अति उग्र स्वरुप है अपने सभी रूपों में |

डाकिनी की कई परिभाषाएं हैं |डाकिनी का अर्थ है –ऐसी शक्ति जो “डाक ले जाए “|यह ध्यान रखले लायक है की प्राचीनकाल से और आज भी पूर्व के देहातों में डाक ले जाने का अर्थ है -चेतना का किसी भाव की आंधी में पड़कर चकराने लगना और सोचने समझने की क्षमता का लुप्त हो जाना |

यह शक्ति मूलाधार के शिवलिंग का भी मूलाधार है | तंत्र में काली को भी डाकिनी कहा जाता है यद्यपि डाकिनी काली की शक्ति के अंतर्गत आने वाली एक अति उग्र शक्ति है |यह काली की उग्रता का प्रतिनिधित्व करती हैं और इनका स्थान मूलाधार के ठीक बीच में माना जाता है |यह प्रकृति की सर्वाधिक उग्र शक्ति है |यह समस्त विध्वंश और विनाश की मूल हैं ,|इन्ही के कारण काली को अति उग्र देवी कहा जाता है जबकि काली सम्पूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति की भी मूल देवी हैं |

तंत्र में डाकिनी की साधना स्वतंत्र रूप से भी होती है और माना जाता है की यदि डाकिनी सिद्ध हो जाए तो काली की सिद्धि आसान हो जाती है और काली की सिद्धि अर्थात मूलाधार की सिद्धि हो जाए तो अन्य चक्र अथवा अन्य देवी-देवता आसानी से सिद्ध हो सकते हैं कम प्रयासों में |इस प्रकार सर्वाधिक कठिन डाकिनी नामक काली की शक्ति की सिद्धि ही है |डाकिनी नामक देवी की साधना तांत्रिकों की प्रसिद्ध साधना है |

हमारे अन्दर क्रूरता ,क्रोध ,अतिशय हिंसात्मक भाव ,नख और बाल आदि की उत्पत्ति डाकिनी की शक्ति से अर्थात तरंगों से होती है |डाकिनी की सिद्धि पर व्यक्ति में भूत-भविष्य-वर्त्तमान जानने की क्षमता आ जाती हैतंत्र जगत में एक और डाकिनी की साधना होती है जो अधिकतर वाममार्ग में साधित होती है |यह डाकिनी प्रकृति [पृथ्वी] की ऋणात्मक ऊर्जा से उत्पन्न एक स्थायी गुण है और निश्चित आकृति में दिखाई देती है |इसका स्वरुप सुन्दर और मोहक होता है |यह पृथ्वी पर स्वतंत्र शक्ति के रूप में पाई जाती है |इसकी साधना अघोरियों और कापालिकों में अति प्रचलित है |यह बहुत शक्तिशाली शक्ति है और सिद्ध हो जाने पर साधक की राह बेहद आसान हो जाती है ,यद्यपि साधना में चूक नहीं होनी चाहिए |

इसका स्वरुप एक सुन्दर ,गौरवर्णीय ,तीखे नाक नक्श [नाक कुछ लम्बी ]वाली युवती की होती है जो काले कपडे में ही अधिकतर दिखती है |काशी के तंत्र जगत में इसकी साधना ,विचरण और प्रभाव का विवरण मिलता है |इस शक्ति को केवल वशीभूत किया जा सकता है ,इसको नष्ट नहीं किया जा सकता ,यह सदैव व्याप्त रहने वाली शक्ति है जो व्यक्ति विशेष के लिए लाभप्रद भी हो सकती है और हानिकारक भी |इसे नकारात्मक नहीं कहा जा सकता अपितु यह ऋणात्मक शक्ति ही होती है यद्यपि स्वयमेव भी प्रतिक्रिया कर सकती है |सामान्यतया यहनदी-सरोवर के किनारों , घाटों ,शमशानों, तंत्र पीठों ,एकांत साधना स्थलों आदि पर विचरण कर सकती हैं ,जो उजाले की बजाय अँधेरे में होना पसंद करती हैं |

इस डाकिनी और मूलाधार की डाकिनी में अंतर होता है |मूलाधार की डाकिनी व्यक्ति के मूलाधार से जुडी होती है ,कुंडलिनी सुप्त तो वह भी सुप्त |तंत्र मार्ग से कुंडलिनी जगाने की कोशिश पर सबसे पहले इसका ही जागरण होता है |इसकी साधना स्वतंत्र रूप से भी होती है और कुंडलिनी साधना के अलावा भी यह साधित होती है |कुंडलिनी की डाकिनी शक्ति की साधना पर प्रकृति की डाकिनी का आकर्षण हो सकता है और वह उपस्थित हो सकती है, यद्यपि प्रकृति में पाई जाने वाली डाकिनी प्रकृति की स्थायी शक्ति है जिसकी साधना प्रकृति भिन्न होती है किन्तु गुण-भाव समान ही होते हैं |इसमें अनेक मतान्तर हैं की डाकिनी की स्वतंत्र साधना पर काली से सम्बंधित डाकिनी का आगमन होता है अथवा प्रकृति की डाकिनी का ,क्योकि प्रकृति भी तो काली के ही अंतर्गत आता है |

वस्तुस्थिति कुछ भी हो किन्तु डाकिनी एक प्रबल शक्ति होती है और यह इतनी सक्षम है की सिद्ध होने पर व्यक्ति की भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही आवश्यकताएं पूर्ण कर सकती है तथा साधना में सहायक हो मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है |

डाकिनी कुंडलिनी मंत्र साधना

डाकिनी की सहायता से सभी सिद्धीयां जल्दी प्राप्त होने लगती हैं कुंडलिनी जागरण का रास्ता भी खुलने लगता है इसके लिये सर्वप्रथम आप को डाकिनी देवी मंत्र सिद्ध माला व सामग्री लेनी होगी उस के साथ साथ ही आप को सारे मंत्र साधना विधा फ्री में मिल जाये गी.
डाकिनी की साधना आप अपने एकांत  कमरे मे भी कर सकते हैं याद रक्खें डाकिनी एक प्रचंड शक्ति है इसलिये यह साधना रात्रि काल ही ऊचित होता है जिसमें कोई व्यवधान न हो यह 21 दिन की साधना है.
दिन वीरवार या नवरात्रि या शुभ दिन से शुरू करें
दिशा – ऊतर या पूर्व मुख आसन पर बैंठे .
डाकिनी एमुलेट
यंत्र मालाको किसी साफ प्लेट में स्थापित करें, धूप दीप लगा मीठा अर्पण करें.

गणेश व शिव जी गुरू जी की 5 /5 माला जाप करें
1- ऊं गं गणप्तये नमः
2- ऊँ नमः शिवाय
3- ऊँ ह्रीं गुरूवे नमः
उसके बाद मूल मंत्र का जाप करें

Dakini Kundalini Mantra

Dakini goddess is very important and powerful to awake Kundalini.
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मुलाधार चक्र साधना

कुंडलिनी तंत्र साधना

सब से पहले इन्हें सिद्ध करने के लिए सहायक , 3 सेट यन्त्रों माला द्वारा मंत्र साधना करे। इसके साथ आप के अंदर रोशनी ओर शक्ति द्वारा देखने की ऊर्जा शक्ति उत्पन्न होने लगे गी , जो कुंडलीनी के अंदर ढूंढने में सहायक होती है। अगर आप कुंडलीनी ओर मुलाधार चक्र को अगर देख नही पा रहे हो तो जागरण केसे करो गे। इसलिए आप को सीढ़ी दर सीढ़ी आगे चढ़ते जाना है। आसान ओर सेफ रास्ता यही है जो शिव द्वारा संचालित एवं निर्देशित किया है।
कुंडलिनी ही हमारे शरीर, भाव और विचार को प्रभावित करती है।
चक्रों के नाम :
मूलत: सात चक्र होते हैं:-

1- मूलाधार,

2- स्वाधीष्ठान,

3- मनीपूर,

4- अनाहता,

5- विशुद्धि,

6- आग्याआज्ञा

7- सहस्रार

8- बिन्दु

मूलाधार चक्र

KUNDALINI AWAKENING

BY MANTRA HAVAN